ऐसी गतिविधियों पर वहाँ की पुलिस मूक बनी देखती रही और सरकार निष्क्रिय रही है।अगर ऐसा ही किसी हिन्दू संगठन द्वारा ईसाई या मुसलमानों के खिलाफ नारे लगाए गए होते तो सबों को जेल में बंद कर दिया गया होता।लेकिन तामिलनाडु और वहाँ की ईसाई कट्टरवादी सरकार चुपचाप देखती रही।ऐसी ही अनेकों गतिविधियाँ अन्यत्र भी होती रही है।
३१ अगस्त २०२२ को रामनाथपुरम में गणेश चतुर्थी पर्व मना रहे दो युवकों अरुण प्रकाश और योगेश्वरन को जिहादियों ने दिन दहाड़े चाक़ू मार दिया। इसी तरह रामलिंगम को ६ फरवरी २०१९ को तिरूभुवनम में जिहादियों द्वारा मार दिया गया। २०१२ से ही तामिलनाडु में जिहादी गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं, असंगठित हिन्दुओं में भय फैलाने के लिए उनको मारा जा रहा है (read Rise of Islamic atrocities against Hindus in TN”, https://organiser.org/2023/02/09/107675/bharat/tamil-nadu-the-rise-of-islamic-atrocities-against-hindus-in-dmk-ruled-state-here-are-the-recent-incidents/) लेकिन वहाँ की सरकारें चुप रहीं हैं। याद रहे तामिलनाडु में 85% से ज्यादा हिन्दू हैं। वर्तमान स्टालिन सरकार जिस तरह हिन्दू आस्थाओं पर चोट पहुँचा रही है, अत्यधिक संभव है अगले चुनाव में वे उसे उखाड़ फेकें। वैसे वहाँ के मुख्य अल्पसंख्यक (ईसाई और मुसलमान) जी-तोड़ प्रयास करते रहे हैं कि हिन्दुओं में जातिगत फूट डालकर उन्हें कमजोर बना दिया जाए। जातिगत भेदभाव तो ईसाइयों व मुसलमानों में भी हैं लेकिन कोई उसकी बातें नहीं करता।
ये जिहादी तो ईसाईयों के भी खिलाफ हैं लेकिन तामिलनाडु में पादड़ियों के समझ में यह नहीं आ रहा है। तामिलनाडु में में ISIS समर्थक खुले आम खौफ का माहौल बना रहे हैं। स्टालिन के आने के बाद हिन्दुओं का तिरस्कार और धर्मांतरण में वहाँ के चर्च भी जुट गए लगते हैं। अपने तथाकथित भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी जिस नफरती पादड़ी जॉर्ज पुनैया से मिले थे वह हिन्दुओं और भारत माता से ही नफ़रत करता है।ऐसे अनेकों चर्च और पादड़ी तामिलनाडु में स्टालिन के संरक्षण में अपने नफरती कार्यों में जुड़े हैं और वहाँ की सरकार मूक दर्शक बनी है।
अब सवाल उठता है कि उदयनिधि का क्या करना चाहिए।ज्यादातर लोगों का मानना है कि अभी हाल के महीनें (28 Apr 2023) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देश के अनुसार तामिलनाडु सरकार को उसके घृणा से भरे वक्तव्य के लिए हिरासत में लेकर उसपर मुकद्दमा चलाना चाहिए लेकिन स्टालिन सरकार की इसमें कोई रूचि नहीं दीख रही।
दूसरा तरीका है उसपर FIR और मुकद्दमा चलाने की; सो तो शुरू हो गया है। देश के अनेक राज्यों में उसपर प्राथमिकी दर्ज की गयी है। एक-आध नासमझ हिन्दू कट्टरवादियों ने उसे मारने के लिए इनाम भी जारी किया है। कुछ का तो यह भी कहना है कि उदयनिधि जहाँ भी पकड़ में आए उसका जीभ काट दो।
उदयनिधि का जुर्म संगीन है क्योंकि यह हिन्दू या सनातन धर्म विरोधी वक्तव्य उसने अपने मंत्री होने के दायरे में दिया है अतः उसे तुरंत वर्खास्त कर हिरासत में लेना चाहिए। यह उसका दुस्साहस है कि सनातन पर उसने हमला किया है।सनातन मुख्यतया वेदों, उपनिषदों एवं पुराणों पर आधारित है और किसी वेद या उपनिषद में किसी भी वर्ण के खिलाफ कोई घृणा या भेद भाव नहीं है। गैर मुस्लिम जातियों के प्रति तो ‘कुरान’ में भेदभाव, घृणा तथा असहिष्णुता भरी पडी है जिसपर सुप्रीम कोर्ट भी संज्ञान लेने से कतरा रहा है (read “Gross violation of Indian fundamental rights”, https://thecounterviews.com/articles/gross-violation-of-indian-fundamental-rights-by-quran/) । यह लोगों की नासमझ की उपज है जो हिन्दू समाज में घृणा और फूट डाल रहे कांग्रेस नेहरू जी के समय से ही करती आ रही है (read “विभाजन विभीषिका (भाग-3): एक और विभाजन ? कभी नहीं”, https://thecounterviews.com/articles/partition-horrors-india-part-3-no-more/) । कुछ नासमझ हिन्दू भी इन अवधारणाओं के शिकार हो रहे हैं जो यथार्थ नहीं। हाँ मनुस्मृति में अवश्य ऐसी कुछ भ्रांतियां डाली गयी थी जिसपर पिछले कई दशकों से प्रतिबन्ध लगा है और इसमें संसोधन की बातें चल रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट को भी यह तय करना है कि अपने मंत्रियों द्वारा घृणित वक्तब्य देने के लिए अगर कोई राज्य सरकार उनकी दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रही है तो फिर उस पर क्या कदम उठाने चाहिए। अगर स्टालिन अपने बेटे के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं करता तो फिर शायद हिन्दू समाज को क़ानून अपने हाथों में लेना होगा, फिर उसका जो भी परिणाम हो। सनातन याहिन्दू धर्म का अपमान करने वाला कोई भी भारत में चैन से नहीं सो सकता। उसे इसके परिणाम भुगतने ही होंगे। वो चाहे ईसाई कट्टरपंथी स्टालिन या उसका बेटा हो या कोई और कट्टरवादी इस्लामी।